China (Cinchona, Quinine) – चायना (सिनकोना)

संशोधित: 06 April 2026 ThinkHomeo

China (Cinchona) होम्योपैथी की पहली दवा है। यह शरीर से तरल पदार्थों (खून, वीर्य, दस्त) के बह जाने से आई कमजोरी, पूरे पेट में गैस और मलेरिया जैसे बुखार की सबसे बड़ी दवा है। जानें इसके लक्षण।

China (Cinchona, Quinine) – चायना (सिनकोना)

China (चायना), जिसे Cinchona (सिनकोना) भी कहा जाता है, होम्योपैथी के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण दवा है क्योंकि इसी से होम्योपैथी का जन्म हुआ था। यह अत्यधिक दुर्बलता और पेट की गैस के लिए प्रसिद्ध है।

व्यापक-लक्षण तथा मुख्य-रोग (Generals and Particulars)

  1. होम्योपैथी का आविष्कार सिनकोना से हुआ।
  2. स्राव जाने के कारण अत्यधिक दुर्बलता: रक्तस्राव (Bleeding), प्रदर (Leucorrhoea), अतिसार (Diarrhea), वीर्यपात (Loss of semen) आदि से उत्पन्न होने वाली दुर्बलता को दूर करता है।
  3. सविराम-ज्वर (Intermittent fever / Malaria)।
  4. ज्वर में तुलना: चायना, युपेटोरियम, आर्स, कैपसिकम, साइमेक्स की तुलना।
  5. पेट में गैस: सम्पूर्ण पेट में वायु भर जाना (Whole abdomen bloated), डकार से आराम न होना।
  6. स्पर्श न सह सकना: परन्तु जोर से दबाने (Hard pressure) से सह सकना।
  7. मानसिक लक्षण: किसी विचार से छुटकारा न पा सकना।

प्रकृति (Modalities) - लक्षण कम या ज्यादा होना

लक्षणों में कमी (Better):

  • जोर से दबाने से (Hard pressure) रोगी को आराम।
  • गर्मी (Warmth) से आराम अनुभव करना।

लक्षणों में वृद्धि (Worse):

  • किसी रस के स्राव (Loss of vital fluids) से रोग में वृद्धि।
  • रक्त तथा रस के क्षय से वृद्धि।
  • थोड़े से स्पर्श (Light touch) को न सह सकना।
  • ठंड (Cold) को न सह सकना।
  • दूध तथा फलों (Milk and fruits) से रोग होना।
  • कुछ दिन छोड़ कर (Periodicity - जैसे हर दूसरे दिन) रोग होना।

 

1. होम्योपैथी का आविष्कार सिनकोना से हुआ

  • डॉ. हनीमैन (Dr. Hahnemann) ने होम्योपैथी का आविष्कार कैसे किया इसके विषय में वे लिखते हैं:   

“मैंने पहले-पहल 1790 में अपने ऊपर सिनकोना की छाल का यह देखने के लिये परीक्षण किया कि इसका सविराम-ज्वर (Intermittent fever) से क्या संबंध है। इस परीक्षण से मेरी आंखों के सामने उस उषःकाल का प्रकाश हुआ जिसका तेज उत्तरोत्तर बढ़ता गया, बढ़ते-बढ़ते वह दिन आ गया जब चिकित्सा-जगत् में एक नवीन चिकित्सा प्रणाली का जन्म हुआ। अपने ऊपर परीक्षणों से स्पष्ट हो गया कि औषधि स्वस्थ व्यक्ति के ऊपर रोग के जो लक्षण उत्पन्न करती है, रोग में उन्हीं लक्षणों के प्रकट होने पर वही औषधि उन लक्षणों को समाप्त कर उस रोग का उन्मूलन (Cure) कर देती है।”  सविराम-ज्वर का अर्थ है—'मलेरिया' (Malaria) जैसा बुखार।

  •  सिनकोना और कुनीन (Quinine) में इतना ही भेद है कि सिनकोना एक छाल का नाम है (इसे चायना भी कहते हैं), और कुनीन सिनकोना की छाल से बनती है। कुनीन को चिनिनम सल्फ़ (Chininum Sulph) कहते हैं।
  • परीक्षण: हनीमैन ने सिनकोना की छाल से परीक्षण किये थे। क्वाथ (Decoction / काढ़ा) को उन्होंने बार-बार लिया और उससे उनके शरीर में मलेरिया के से सविराम-ज्वर के-से लक्षण उत्पन्न हो गए। क्योंकि सिनकोना मलेरिया को दूर भी करती है और स्वस्थ शरीर में इसे लेने से हनीमैन में मलेरिया के से लक्षण उत्पन्न हो गए, इससे उन्हें सूझा कि संभवतः सिनकोना मलेरिया को इसलिए दूर करती है क्योंकि शरीर में यह मलेरिया जैसी बीमारी उत्पन्न कर देती है।
  • नींव: इसी विचार से 'होम्योपैथी' (Homeopathy - समरूप चिकित्सा) की नींव पड़ी। इस प्रकार होम्योपैथी का आविष्कार सिनकोना से हुआ।

2. स्राव जाने के कारण अत्यधिक दुर्बलता (Debility from loss of fluids)

  • हनीमैन ने अपने काल में देखा कि सिनकोना का दो रोगों में उपयोग किया जाता था: एक रोग था निर्बलता (Weakness) को दूर करना, दूसरा था सविराम-ज्वर (Intermittent fever) को दूर करना। वे इस परिणाम पर पहुंचे कि इन दोनों दिशाओं में इसका प्रयोग इसीलिये सफल होता है क्योंकि 'स्वास्थ्य में' इसके लेने से दुर्बलता भी आ जाती है, और सविराम-ज्वर-जैसा ज्वर भी आ जाता है।

दुर्बलता का क्षेत्र (Sphere of Weakness): 

  • दुर्बलता के लिये होम्योपैथिक सिनकोना (चायना) अमोघ औषधि है। परन्तु कैसी दुर्बलता? हनीमैन का कहना था कि जो रक्तहीनता (Anemia) Ferrum दूर कर सकेगा वह सिनकोना नहीं दूर कर सकेगा; जो स्नायु-संबंधी कमजोरी (Nervous weakness) Acid Phos दूर कर सकेगा वह सिनकोना नहीं दूर करेगा।
  • China का क्षेत्र: जब शरीर से रक्त स्राव बेहद हो गया हो (Severe bleeding), प्राणद स्रावों (Vital fluids) का बहाव हुआ हो, वीर्य-स्राव (Loss of semen) से दुर्बलता आ गई हो, ऐसी निर्बलता को सिनकोना दूर करता है। इस प्रकार की निर्बलता में इसे 'Pick-me-up' (शक्तिवर्धक) कहा जा सकता है।

इन्फ्लुएंजा और अन्य बीमारियों के बाद की कमजोरी: 

  • यद्यपि होम्योपैथी में इस प्रकार के टॉनिकों को स्थान नहीं है, इन्फ्लुएन्जा के बाद जब रोगी बेहद कमजोरी अनुभव करता है, सर्दी सहन नहीं कर सकता, सोचने लगता है कि अब शायद ठंडे कपड़े पहनने के दिन ही नहीं आयेंगे, तब China 200 की एक मात्रा सारा नक्शा बदल देती है। (इन्फ्लुएन्जा में अगर रोगी कमजोरी के साथ-साथ थकान, भारीपन अनुभव करे, शरीर में कंपन हो, तो Gelsemium से लाभ होता है। अधिक काम करने से मानसिक और शारीरिक थकान में Arnica लाभ करता है)।

रक्तस्राव (Hemorrhage) तथा उससे होने वाली दुर्बलता: 

  • इस रोगी को रक्तस्राव बहुधा हुआ करता है। किसी भी अंग से रक्तस्राव हो सकता है (नाक, गले या जरायु से)। रक्तस्राव होते-होते इसके बीच में किसी-किसी को ऐंठन (Convulsions) पड़ जाती है। ऐसी हालत में सिनकोना (China)  रक्तस्राव को ही नहीं बन्द कर देगा, रक्तस्राव से होनेवाली कमजोरी को भी नहीं होने देगा।

Secale Cornutum से तुलना: 

  • Secale में भी रक्तस्राव के लक्षण हैं। परन्तु China शीत-प्रधान (Chilly) है, जच्चा को ठंड लग जाए तो ऐंठन पड़ जाती है; जबकि Secale ऊष्ण प्रधान (Hot) है, रोगिन कपड़े को परे फेंक देती है, ठंड चाहती है। प्रदर की निर्बलता को भी सिनकाना दूर करता है।

अतिसार (Diarrhea) और वीर्यपात से दुर्बलता:

  • दस्तों की कमजोरी: सिनकोना का अतिसार पनीला, पीला होता है। अपच भोजन (Undigested food) निकल जाता है। जो बात अन्य औषधियों में नहीं पायी जाती वह यह है कि दस्त दर्द रहित (Painless) होते हैं। दस्तों की इस कमजोरी को यह दूर करता है।
  • वीर्यपात (Loss of Semen): शरीर की प्राणप्रद ग्रन्थियों से स्राव के बहुत अधिक निकल जाने की कमजोरी को यह दवा दूर कर देती है। नवयुवक जो हस्त-मैथुन (Masturbation) आदि कुकर्मों से क्षीण-काय हो जाते हैं उनकी कमजोरी को यह दूर करता है।

 

3. सविराम-ज्वर (Intermittent fever / Malaria)

  • ऐलोपैथ तो हर प्रकार के मलेरिया में कुनीन दे देते हैं, परन्तु हनीमैन का कथन है कि मलेरिया-ज्वर भी सब एक से नहीं होते। चायना अपने ढंग के सविराम-ज्वर में ही काम देता है, हर प्रकार के सविराम-ज्वर में नहीं।

चायना के बुखार में प्यास का लक्षण:

  • चायना के बुखार में प्यास (Thirst) का लक्षण विशेष ध्यान देने के योग्य है।
  • जाड़ा (Chill) लगने के बहुत पहले रोगी को प्यास लगने लगती है। ज्यों-ही जाड़ा लगने लगता है, प्यास जाती रहती है (Thirstless during chill)। जाड़े से पहले प्यास का लगना शुरू होना इतना मुख्य लक्षण है कि इस प्यास के शुरु होते ही रोगी समझ जाता है कि जाड़ा बुखार आने वाला है।
  • उत्ताप (Heat) की अवस्था आने पर फिर प्यास लौट आती है। जब उत्ताप पूर्ण रूप में चढ़ जाता है, तब प्यास फिर खत्म हो जाती है।
  • पसीने (Sweat) के पूरे काल में जबर्दस्त प्यास रहती है।
  • शीत में और उत्ताप में प्यास का हट जाना, और शीत से पहले प्यास का लगना, पसीने के पूरे काल में प्यास-ये इसके ज्वर के विशेष-लक्षण है।

4. ज्वर में चायना, युपेटोरियम, आर्स, कैपसिकम, साइमेक्स की तुलना

  • शीत या पूर्ण-उत्ताप की अवस्था में प्यास का होना चायना न देने का लक्षण है। प्यास शीत से पहले लगती है, शीत में नहीं। जब चायना के रोगी को जिसे तीसरे, सातवें, चौदहवें दिन ज्वर आता हो, तब प्यास के लक्षण पर ही वह समझ जाता है कि ज्वर आने वाला है।
  • Eupatorium Perf: रोगी प्यासा होते हुए भी पानी लेने से इन्कार कर देता है क्योंकि पानी के हरेक घूंट से उसकी सर्दी बहुत बढ़ जाती है।
  • Arsenic Album: रोगी प्यासा होता है, परन्तु पानी पीना नहीं चाहता क्योंकि पानी पीने से उसे उल्टी आ जाती है, फिर भी उसकी प्यास इतनी जर्बदस्त होती है कि थोड़ा-थोड़ा पानी पीता जाता है।
  • Capsicum: सर्दी पीठ से शुरू होती है, सर्दी प्यास के साथ शुरू होती है, परन्तु पानी पीने से रोगी ठंड के मारे कांपने लगता है, और इसके साथ पीठ में तथा अंग में पीड़ा होने लगती है।
  • Cimex (साइमेक्स): पानी पीने से रोगी के सब लक्षण (खांसी, सिर-दर्द) बढ़ने लगते हैं।
  • कपड़ा ओढ़ना: चायना में उत्ताप की अवस्था में रोगी बार-बार कपड़ा हटाने का प्रयत्न करता है परन्तु कपड़ा हटाते ही उसे सर्दी सताने लगती है, इसलिये फिर कपड़ा ओढ़ लेता है। ज्वर में कपड़ा ओढ़ने और उतराने के चायना के लक्षण नक्स वोमिका के सदृश है।

चायना के संबंध में यह स्मरण रखना चाहिये कि ज्वर में शीत के प्रारंभ होते ही प्यास जाती रहती है, शीतावस्था के आने से बहुत पहले प्यास का आगमन होता है।

 

5. संपूर्ण पेट में वायु भर जाना, डकार से आराम न होना (Whole abdomen bloated)

  • रोगी का पेट तंबूरा बना रहता है (Tympanitic abdomen), लगातार डकार आते हैं परन्तु आराम नहीं आता, पेट भरा-का-भरा महसूस होता है।
  • Carbo Veg और Lycopodium में भी पेट में वायु का प्रकोप रहता है। Carbo Veg में डकार से कुछ आराम आता है; Lycopodium में कभी आराम आता है, कभी नहीं भी आता।
  • जब पेट में वायु अटक जाए (Incarcerated flatus) और ऐसा मालूम पड़े कि पेट की मशीन ही रूठ गई है, तब China 200 की एक मात्रा वायु को निकाल फेंकेगी।
  • कार्बो वेज भी ऐसी हालत में काम कर देता है।

 

6. स्पर्श न सह सकना, परन्तु जोर से दबाने से सह सकना (Sensitive to light touch, better by hard pressure)

  • सारा स्नायु-मंडल (Nervous system) अत्यन्त अनुभूतिमय (Sensitive) हो जाता है। पीड़ा का स्थान 'छूते ही' (Light touch) रोगी कराह उठता है, छूने नहीं देता।  परन्तु फोड़े को हल्के-हल्के दबाते चले जाएं, तो रोगी इस दबाव को सहने लगता है, यहाँ तक कि जब दबाव जोर का हो जाता है (Hard pressure), तब भी रोगी उस दबाव को सह लेता है, उसे कुछ आराम-सा लगता है।
  • जो दांत दर्द कर रहा होता है उसे दबाये चले जायें, तो उस दबाव से भी आराम मिलता है। दबाने से आराम मिलना इस औषधि का विशिष्ट-लक्षण है।
  • स्नायु-मंडल की यह संवेदनशीलता बालों में भी प्रकट होती है। अगर बालों को हवा लगे तब भी बालों में दर्द महसूस होता है। 
  • कहीं भी नसों में अगर दबाने से दर्द को आराम हो, तो सिनकोना (चायना) उपयोगी है।
  • ऐसे दर्द जो ज़रा-से स्पर्श से जाग्रत हो जाएं और तीव्र रूप धारण कर लें, चायना से ठीक हो जाते हैं। स्पर्श-द्वेष (Aversion to touch) इस औषधि का चरित्रगत लक्षण है।

 

7. किसी विचार से छुटकारा न पा सकना (Fixed Ideas)

  • इस रोगी के दिमाग में कुछ विचार ऐसे जम जाते हैं (Fixed Ideas) कि वह उनसे छुटकारा ही नहीं पा सकता। अधिकतर उसके दिमाग में यह बैठ जाता है कि उसके शत्रु उसके पीछे पड़े हुए हैं (Paranoia)। वह जहाँ कहीं भी जाता है, यही समझता रहता है कि उसके शत्रु उसके हर कार्य में बाधा डाल रहे हैं। ये विचार उसके मन पर ऐसे हावी हो जाते हैं कि वह बिस्तर से कूद पड़ता है, और कभी-कभी इन काल्पनिक शत्रुओं से छुटकारा पाने के लिये आत्मघात (Suicide) तक कर बैठता है। 
  • ऐसे रोगों में Natrum Mur भी उपयोगी है।

 

8. इस औषधि के अन्य लक्षण

i. सामयिकता (Periodicity): अगर कोई रोग हर दूसरे-तीसरे दिन आता है, तो चायना को स्मरण करना चाहिए। सामयिकता (Periodicity) इसका विशेष लक्षण है।

ii. जिगर का पुराना रोग (Chronic Liver Trouble): पेट के दाईं तरफ के निचले भाग में दर्द होता है। जिगर बढ़ा हुआ और स्पर्श-द्वेषी (Sensitive to touch) होता है। त्वचा पीली हो जाती है। मल का रंग सफेद (White/Clay colored stool) होता है क्योंकि पित्त का पूरा प्रवाह नहीं हो रहा होता।

iii. कीड़ों की उल्टी के स्वप्न: अगर रोगी को बार-बार ऐसे स्वप्न आएं कि उल्टी में जीवित-कृमि (Live worms) निकल रहे हैं तो यह इसका विशिष्ट लक्षण है।

 

9. China (चायना) का सजीव, मूर्त चित्रण (Living Image)

  • शरीर से रक्त, वीर्य या किसी प्रकार का तरल पदार्थ निकल जाने से पीले चेहरे वाला, वीर्यहीन, रक्तहीन (Anemic) व्यक्ति जिसकी आंखें धंस गई हों। जो कमजोर हो गया हो, कमजोरी से पसीना आ जाता हो।
  •  शोथ (Swelling) आदि रोग के स्थान को 'छूने' से उसे कष्ट होता हो (पर दबाने से आराम हो)।
  • बालों को हवा छू जाए तब भी घबराता हो। 
  • दूध-फल आदि खाने से पेट फूल जाता हो। 
  • पेट तम्बूरे की तरह फूला रहता हो, डकारें मारता हो, परन्तु डकारों से भी आराम न आता हो। 
  • जिसकी शिकायतें एक दिन बाद, दो दिन बाद आती रहती हों (Periodicity)। 
  • जिगर के पुराने रोग से पीड़ित हो। 
  • पतले दस्त आते हों परन्तु दस्तों के साथ 'दर्द न होता हो'। 
  • कमजोरी और रक्तशून्यता चेहरे पर लिखी हो, कमजोरी से कानों में भनभनाहट (Ringing in ears/Tinnitus) होती हो। 
  • सर्दी न सहन कर सकता हो, मलेरिया जैसे ज्वर से देर तक पीड़ित रहा हो—
  • ऐसा होता है चायना का रोगी।

10. शक्ति तथा प्रकृति (Potency and Nature)

  • शक्ति (Potency): कमजोरी में 6 या 12 शक्ति का चायना तब तक दोहराना चाहिए जब तक कमजोरी के लक्षण दूर न हों, फिर बन्द कर देना चाहिए। वैसे अन्य औषधियों की तरह 30, 200 शक्ति व्यवहार में आती है।
  • प्रकृति: औषधि 'सर्द' (Chilly) प्रकृति के लिए है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: China होम्योपैथी में इतनी खास क्यों है? उत्तर: क्योंकि डॉ. हनीमैन ने सबसे पहले इसी दवा (सिनकोना की छाल) का खुद पर परीक्षण किया था और इसी से 'समरूप चिकित्सा सिद्धांत' (Like cures like) यानी होम्योपैथी की खोज हुई थी।

प्रश्न 2: गैस (Acidity/Bloating) के लिए China का प्रयोग कब करें? उत्तर: जब गैस पूरे पेट में भर जाए, पेट गुब्बारे या ढोल की तरह तन जाए, और डकार आने पर भी रोगी को गैस से कोई आराम न मिले, तब China सबसे अच्छी दवा है।

प्रश्न 3: किस प्रकार की कमजोरी में यह सबसे अच्छा काम करती है? उत्तर: जब कमजोरी शरीर से किसी तरल पदार्थ के बहुत अधिक बह जाने के कारण आई हो—जैसे भारी मासिक स्राव, डायरिया (दस्त), खून बहना, पसीना आना या वीर्य नाश।


यह सामग्री सिर्फ शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

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